
में आप को गुजरात दारू न जो पाबन्दी है,उन से जुड़े कुछ सत्य के बारे मे बात करना चाहता हूँ.आज अकेले दारू के कारन गुजरात का विकास कुछ हद तक रुका हुआ है.और मेरे ख्याल से सबसे ज्यादा पिने वाले में भारत मे गुजरात के लोग भी है.वास्तविकता है हकीकत है .गुजरात में दारू का जो काला कारोबार है वो भारत मे कोई जगह नहीं है ये कारोबार मे गुजरात के नेता से लेकर गुजरात के पुलिस का एक छोट कांस्टेबल भी सामिल है .और भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है इन चीजो में आखिर सबसे जायद नुकसान है तो सरकार और पिने वाले लोग दोनों को सामान है.गुजरात मे दारू की पाबन्दी हटाई जाये तो सरकार का कुछ रुका हुआ एंजिन एक दम फास्ट हो जायेगा क्यों के गुजरात मे गावो में बड़े शहेरो में राष्ट्रिय धोरिमार्ग और राज्य के मार्गो पर दारू की दुकाने खुल जाएगी जिन में कमसे कम पांच लाख नए रोजगारी का सर्जन होगा.और साथ साथ मे खेती में भी परिवर्तन आयेगा क्यों के फलो का जो खेती होगा जिसमे किसान को रोजगारी के साथ अपना रोजगार के लिए एक नया दिशा मिलेगा और किसान की स्थिति मे और भी सुधार आयेगा.इस तरह सभी दुकाने गुजरात के शिक्षित और अर्ध शिक्षित नोजवानो को लायसन दिया जायेगा .और इस के बाद गुजरात मे महारष्ट्र,राजस्थान,हरियाणा,दमन,दिउ,से आने वाले दारू की चोरी बांध हो जाएगी वैसे भी गुजरात के पुलिस तंत्र के पास संख्या कम है तो ये चला जायेगा तो वो एनी गुनाह की और अपना ध्यान केन्द्रित कर पायेगा तो गुनाह कम होगे और पुलिस के भ्रष्टाचार भी बांध हो जायेगा इस तरह दी गुना फायदा होगा.और बाद मे गुजरात पुलिस कही गरीब को दारू पिए हुआ हालत मे गिरफ्तार करती है.इन मे गरीब बिचारे पुलिस के मरने से बचने के लिए पुलिस को हजार पाचसो की रिश्वत देते है तो ये भी बांध हो जायेगा.और दारू की बोतल जो आज काला बाजार मे ६०० में मिलता है वो १५० मे मिलेगा तो लोग और सरकार दोनों को फायदा होगा,और य फायदे से भी ज्यादा फायदा सेहत को नुकशान करने वाला हल्का दारू लोग पिटे जो ज्यादातर गरीब है.तो ये हल्का ब्रांड क्वोलिटी का दारू बंध हो जायेगा तो गरीब लोग को भी फायदा है.और जिस को पुलिस गिरफ्तार करती है.उन एक व्यक्ति के पीछे पुलिस लोकुअप चार्ज का रोजाना १००० का खर्च होता है.जो सरकार की तिजोरी से जा रहा है.तो इस तरह सरकार को सालाना १०० करोड़ का फायदा हो सकता है.और बाद मे अदालत का खर्च होता है जो एक सालाना तक़रीबन ५०० करोड़ तक है जिस के पीछे कही न्यायधीश का समय बर्बाद होता है साथ मे अदालत मे हजरोकैस बिना निकल के पडे है वो भी बंध हो जायेगे.और गुजरात सरकार जो पैसा खर्च कर रही है वो और दारू के उपर भारत सरकार और गुजरात सरकार को जो टेक्स मिलेगा वो अरबो रूपये का है और सेकड़ो लोगो को रोजगार और वो लोग जो कमायेगे वो अलग की बात है.इस तरह गुजरात मे अद्रु का पाबंदी वापस लेना चाहिए और इन का विरोध करने वाले इस लिए विरोध नहीं करते है के दारू गरीब को ख़त्म कर रहा है मगर इस लिए विरोध कर रहे है के उनका दो नंबर का इंकम बंध हो जायेगा और ये गाँधी का नाम बदनाम करके दारू बंदी गुजरात के ऊपर थोक रखा है.गाँधी किसी की स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं था.तो किस लिए अकेले गुजरात मे दरुबदी लागु करके रखा है.अब वक्त अ गया है अन्यायी प्रथा बंद करने का इस लिए लोग और सरकार के हित ये करना जरुरी है क्यों के गुजरात सरकार लोगो के पैसे,लोगो की शेहद ,दोनों से खेल रही है,
राजू ओडेदरा at .पोरबंदर मो.09825652328
